मुंबई की प्रमुख नागरिक संस्था बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के इतिहास में पहली बार किसी महिला को नगर आयुक्त नियुक्त किया गया है। 55 वर्षीय आईएएस अधिकारी अश्विनी भिडे ने मंगलवार को पदभार संभालते हुए 160 वर्षों की परंपरा को तोड़ दिया।
1995 बैच की आईएएस अधिकारी अश्विनी भिडे ने इस पद पर भुषण गगरानी का स्थान लिया, जो मंगलवार को सेवानिवृत्त हुए। भिडे ने कहा कि यह उपलब्धि इसलिए चर्चा में है क्योंकि इससे पहले सरकार को इस पद पर किसी महिला को नियुक्त करने का अवसर नहीं मिला था।
उन्होंने कहा, “मैं एक तरह से उनके (भुषण गगरानी) पदचिह्नों पर चल रही हूं। वह कोल्हापुर जिले से हैं और मैं सांगली से हूं। जब उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा दी थी, तब वह मेरे लिए प्रेरणा थे। मुझे खुशी है कि मैं उनसे यह पदभार संभाल रही हूं।”
बीएमसी में महिलाओं का बढ़ता दबदबा
अश्विनी भिडे की नियुक्ति के साथ ही बीएमसी में शीर्ष पदों पर महिलाओं की मजबूत उपस्थिति देखने को मिल रही है। वर्तमान में मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े हैं, जबकि किशोरी पेडणेकर विपक्ष की नेता की भूमिका निभा रही हैं।
इसके अलावा, बीएमसी मुख्यालय की चार में से तीन प्रमुख वैधानिक समितियों का नेतृत्व भी महिलाओं के हाथों में है। इनमें शिक्षा समिति की अध्यक्ष राजेश्री शिरवाडकर और बेस्ट समिति की अध्यक्ष तृष्णा विश्वासराव शामिल हैं।
महाराष्ट्र में महिला नेतृत्व को बढ़ावा
महाराष्ट्र सरकार ने पिछले दो वर्षों में कई अहम पदों पर महिलाओं को नियुक्त किया है। जनवरी 2024 में रश्मि शुक्ला को राज्य की पहली महिला पुलिस महानिदेशक (DGP) बनाया गया, वहीं सुजाता सौनिक को राज्य की पहली महिला मुख्य सचिव नियुक्त किया गया।
मेयर ऋतु तावड़े ने दी बधाई
मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े ने अश्विनी भिडे को बधाई देते हुए कहा कि यह पूरे शहर और प्रशासन के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि महिला नेतृत्व से मुंबई के विकास को नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने विश्वास जताया कि मेयर और आयुक्त दोनों पदों पर महिलाओं के होने से मुंबई को एक स्मार्ट और सुरक्षित शहर बनाने का सपना साकार किया जा सकेगा।
अनुभव से विकास को मिलेगी नई गति
अश्विनी भिडे को मुंबई मेट्रो परियोजनाओं में उनके व्यापक अनुभव और अनुशासित कार्यशैली के लिए जाना जाता है। माना जा रहा है कि उनके नेतृत्व में बीएमसी की कार्यप्रणाली और शहर के विकास कार्यों को नई गति मिलेगी।