नई दिल्ली: महिला आरक्षण कानून को लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार तेजी से कदम बढ़ा रही है। सरकार इस मुद्दे पर प्रस्तावित संशोधनों को पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। वहीं, विपक्ष ने इस पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
2023 में पास हुआ था कानून, लागू अब तक नहीं
महिला आरक्षण कानून, जिसे आधिकारिक तौर पर संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 कहा जाता है, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करता है। हालांकि, यह अब तक लागू नहीं हो पाया है क्योंकि इसे परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया से जोड़ा गया है, जो 2027-28 तक प्रस्तावित है।
संशोधन का उद्देश्य क्या है?
सरकार अब इस कानून में संशोधन कर इसे परिसीमन प्रक्रिया से अलग (delink) करने पर विचार कर रही है, ताकि महिलाओं को आरक्षण का लाभ जल्द मिल सके।
विपक्ष की सर्वदलीय बैठक की मांग
मंगलवार को कई विपक्षी दलों ने संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। इस पत्र में कहा गया कि:
- बैठक प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होनी चाहिए
- प्रस्तावित संशोधनों का विस्तृत खाका पहले साझा किया जाए
- बैठक 29 अप्रैल 2026 को विधानसभा चुनावों के बाद आयोजित की जाए
यह पत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लेटरहेड पर लिखा गया और इसमें कई विपक्षी दलों के नेताओं के हस्ताक्षर शामिल थे।
बजट सत्र में बिल लाने की थी योजना
सरकार पहले इस संशोधन को मौजूदा बजट सत्र में लाने पर विचार कर रही थी, लेकिन अब संकेत मिले हैं कि:
- जरूरत पड़ने पर विशेष सत्र बुलाया जा सकता है
- या फिर इसे मानसून सत्र तक टाला जा सकता है
यह जानकारी लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में सामने आई।
कई दलों के नेताओं ने जताया समर्थन
महिला आरक्षण कानून को लागू करने की पहल का विभिन्न दलों की महिला सांसदों ने स्वागत किया:
- जेडीयू सांसद लवली आनंद ने इसे “सराहनीय कदम” बताया
- भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि यह देश की आधी आबादी से किया गया वादा पूरा करता है
- समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने समर्थन करते हुए कहा कि लागू करने की प्रक्रिया पर स्पष्टता जरूरी है
क्या होगा आगे?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार कब और किस रूप में संशोधन बिल पेश करती है। यदि सर्वदलीय सहमति बनती है, तो महिला आरक्षण कानून का लागू होना तय समय से पहले संभव हो सकता है, जिससे भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।