देश के हाईकोर्ट में केवल 14.8% महिला जज, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में सबसे ज्यादा

भारत की उच्च न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी अभी भी सीमित है। कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश के हाईकोर्टों में कुल 781 कार्यरत न्यायाधीशों में से केवल 116 महिला जज हैं। यानी कुल संख्या का लगभग 14.85% ही महिलाएं हैं।

हालांकि जिला न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में उनकी संख्या अभी भी काफी कम है।

सुप्रीम कोर्ट में केवल एक महिला जज

सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान में कुल 33 कार्यरत जजों में से केवल एक महिला जज, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना हैं। सितंबर 2021 में जस्टिस हिमा कोहली, जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस बी.वी. नागरत्ना को एक साथ सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया था।

समय के साथ अन्य महिला जज सेवानिवृत्त हो गईं और अब केवल जस्टिस नागरत्ना ही सुप्रीम कोर्ट की एकमात्र महिला सदस्य हैं। इतिहास में किसी एक समय पर सुप्रीम कोर्ट में अधिकतम चार महिला जज रही हैं, जो 2021 की नियुक्तियों के बाद हुआ था।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जिला न्यायपालिका में लगभग 37% जज महिलाएं हैं।

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में सबसे ज्यादा महिला जज

देश के 25 हाईकोर्टों में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में महिला जजों की संख्या सबसे अधिक है। यहां 61 कार्यरत जजों में से 18 महिला जज हैं, जो लगभग 29.51% है।

अन्य प्रमुख हाईकोर्टों में महिला जजों की स्थिति इस प्रकार है:

  • दिल्ली हाईकोर्ट – 10 महिला जज (22.73%)
  • मद्रास हाईकोर्ट – 10 महिला जज (18.87%)
  • बॉम्बे हाईकोर्ट – 12 महिला जज (15%)
  • कर्नाटक हाईकोर्ट – 9 महिला जज (19.57%)
  • गुजरात हाईकोर्ट – 7 महिला जज (20%)
  • तेलंगाना हाईकोर्ट – 7 महिला जज (25%)
  • कलकत्ता हाईकोर्ट – 8 महिला जज (18.60%)

छोटे हाईकोर्टों में सिक्किम हाईकोर्ट में महिला प्रतिनिधित्व प्रतिशत के हिसाब से सबसे अधिक है, जहां 3 जजों में से 1 महिला जज (33.33%) हैं।

कई हाईकोर्टों में बेहद कम प्रतिनिधित्व

कई बड़े हाईकोर्टों में महिला जजों की संख्या अभी भी काफी कम है। उदाहरण के तौर पर:

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट – 110 जजों में से केवल 7 महिलाएं (6.36%)
  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट – 42 जजों में केवल 1 महिला (2.38%)
  • केरल हाईकोर्ट – 7.5%
  • झारखंड हाईकोर्ट – 7.14%
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट – 6.67%
  • पटना हाईकोर्ट – 5.26%
  • उड़ीसा हाईकोर्ट – 5.26%

कुछ हाईकोर्टों में एक भी महिला जज नहीं

देश के तीन हाईकोर्ट ऐसे भी हैं जहां फिलहाल एक भी महिला जज नहीं है:

  • मणिपुर हाईकोर्ट
  • त्रिपुरा हाईकोर्ट
  • उत्तराखंड हाईकोर्ट

ऐतिहासिक आंकड़े भी बताते हैं कम भागीदारी

हाईकोर्टों के स्थापना काल से अब तक के आंकड़े भी महिलाओं की सीमित उपस्थिति को दर्शाते हैं। उदाहरण के तौर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में अब तक कुल 858 जजों में से केवल 23 महिला जज (2.68%) रही हैं।

इसी तरह पटना हाईकोर्ट में 376 में से 10 महिलाएं (2.66%) और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 309 में से 13 महिलाएं (4.21%) ही जज बनी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायपालिका में लैंगिक संतुलन बढ़ाने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया में महिलाओं को अधिक अवसर देने और संस्थागत सुधारों की आवश्यकता है।

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