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जानिये महिलाये किस तरह से कर सकती है पिंड दान
 

हिन्दू धर्म में श्राद्ध का एक अलग विषेस महत्त्व है। श्राद्ध पक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इन दिनों पितृ, पितृलोक से मृत्यु लोक में अपने वंशजों से सूक्ष्म रूप में मिलने आते हैं और हम उनके सम्मान में अपनी सामर्थ्यनुसार उनका स्वागत-सत्कार करते हैं। और बतादे की महिलाये भी पिंडदान कर सकती है,जिसके लिए कुछ नियम बनाये गए है जो गरुण पुराण में लिखे है। जैसे की किसी अवस्था में घर में कोई पुत्र नहीं है या पति नहीं है तो महिला पिंड दान कर सकती है। क्युकी पुत्र की प्राप्ति उनके घर में नहीं हुई तो पिता उस दान को स्वीकर करता है। और बाल्मीकि रामायण में सीताजी ने दसरथ का पिंडदान किया था।