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जानिए एशिया की पहली महिला ट्रैन ड्राइवर सुरेखा यादव के बारे में ​​​​​​​
 

आज नारी को हर क्षेत्र में इतना सम्म्मान इसलिए मिलता है क्युकी वह पुरुसो के साथ कदम से कदम मिला कर कार्य कर रही है। प्लेन उड़ाने से पटरी पर ट्रेन दौड़ाने तक में महिलाएं सक्षम हैं। लेकिन आधुनिक भारत की महिलाओं को आज हर क्षेत्र में मौके मिल रहे हैं, इसी कारण वह अधिक सक्षम है। हालांकि आज की महिलाओं को ये मौके इतिहास की उन महिलाओं के कारण मिले, जिन्होंने पहली बार किसी ऐसे क्षेत्र में कदम रखा, जहां कभी किसी महिला ने प्रवेश ही नहीं किया था। उसके बाद महिलाओ के लिए रास्ते खुलते गए।

सुरेखा यादव महाराष्ट्र की रहने वाली थी। और उन्होंने अपनी पढ़ाई वही से की और इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया।

वह टीचर बनना चाहती थी लेकिन बाद में उनकी राह बदल जाने के कारण वह लोको पायलट बन गयी। उन्होंने सबसे पहले मालगाड़ी के ड्राइवर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। बाद में उनका प्रमोशन हुआ और वह एक्सप्रेस मेल की पायलट बनीं।