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बेटियों ने किया पिता का अंतिम संस्कार -

 
राजस्थान के डूंगरपुर ज़िले की बेटियों ने पुरानी मान्यताओं को तोड़ते हुए पिता की अर्थी को न केवल कंधा दिया, बल्कि श्मशान तक जाकर मुखाग्नि दी और अंतिम संस्कार किया. बेटियों ने एक उदाहरण पेश कर बता दिया कि बेटा-बेटी समान होते हैं. इस दौरान वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं.हिंदू रीति रिवाज के अनुसार बेटियां और महिलाएं श्मशान में नहीं जाती. मान्यता यह भी है कि बेटा न होने पर भी बेटियां पिता की अर्थी को कंधा या मुखाग्नि नहीं दे पातीं. मगर डूंगरपुर शहर के राजपुर में दो बेटियों ने इस मान्यता को तोड़ा है. राजपुर के महिपाल पंचाल 4 साल से खाड़ी देश कुवैत में काम करते थे. 18 जनवरी को दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई थी. कुवैत में आवश्यक कार्यवाही के बाद उनका शव 23 जनवरी को डूंगरपुर पहुंचा. 12 साल पहले एक हादसे में महिपाल के बेटे की मौत हो गई थी. अब उनकी बेटी काजल और समीक्षा ही हैं, उन्होंने पिता को मुखाग्नि दी.